रांची : झारखंड के एक आदिवासी और जंगल क्षेत्रों में सुरक्षा बलों और माओवादियों के बीच हुई एक मुठभेड़ में एक महिला नक्सली समेत दो नक्सली ढेर हो गए हैं। यह मुठभेड़ राज्य के सरायकेला-खरसावां जिले के एक घने जंगल में हुई, जहां सुरक्षा बलों ने माओवादी संगठन के खिलाफ सघन अभियान छेड़ा था।
सुरक्षा बलों के अनुसार, मुठभेड़ उस समय हुई जब उन्होंने माओवादी गतिविधियों के बारे में खुफिया जानकारी मिलने के बाद इलाके की घेराबंदी की थी। जैसे ही सुरक्षा बलों ने माओवादी समूह का पीछा करना शुरू किया, नक्सलियों ने सुरक्षा बलों पर अचानक गोलीबारी शुरू कर दी। इसके जवाब में सुरक्षा बलों ने मोर्चा लिया और दोनों पक्षों के बीच जमकर गोलीबारी हुई, जिसमें दो माओवादी मारे गए।
मारे गए नक्सलियों में महिला भी शामिल:
सुरक्षा बलों द्वारा मारे गए नक्सलियों में एक महिला नक्सली भी शामिल है। पुलिस के अनुसार, महिला नक्सली स्थानीय माओवादी संगठन में महत्वपूर्ण पद पर थी और उसके खिलाफ कई मामलों में गिरफ्तारी वारंट जारी था। यह महिला नक्सली इलाके में माओवादी संगठन की गतिविधियों में सक्रिय रूप से शामिल थी और सुरक्षा बलों के लिए एक बड़ा लक्ष्य थी। मारे गए अन्य नक्सली भी संगठन के उच्च रैंक के सदस्य थे, जो इलाके में माओवादी विरोधी गतिविधियों में संलिप्त थे।
हथियार और गोला-बारूद की बरामदगी:
मुठभेड़ के बाद, घटनास्थल से बड़ी मात्रा में हथियार, गोला-बारूद, माओवादी साहित्य और कुछ दस्तावेज बरामद किए गए हैं। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि बरामद किए गए सामानों से यह प्रतीत होता है कि यह माओवादी समूह अभी भी इलाके में सक्रिय था और अपनी गतिविधियों को फैलाने की कोशिश कर रहा था। दस्तावेजों में कुछ योजनाओं और माओवादी संगठनों के स्थानीय संपर्कों के बारे में जानकारी मिली है, जो सुरक्षा बलों के लिए आगामी अभियानों के लिए सहायक हो सकती है।
सुरक्षा बलों की तैयारी और आगे की रणनीति:
मुठभेड़ के बाद, पुलिस और अर्धसैन्य बलों ने पूरे क्षेत्र में तलाशी अभियान तेज कर दिया है। अधिकारियों ने बताया कि इस इलाके में माओवादी संगठन के अन्य सदस्य भी छिपे हो सकते हैं, जिन्हें पकड़ने के लिए अतिरिक्त बल तैनात किया गया है। राज्य सरकार ने सुरक्षा बलों को अतिरिक्त संसाधन उपलब्ध कराए हैं ताकि इस संकट का हल जल्द से जल्द निकाला जा सके।
झारखंड में माओवादी संकट:
झारखंड में माओवादी हिंसा एक पुरानी समस्या रही है। राज्य के कई आदिवासी और नक्सल प्रभावित इलाकों में माओवादी संगठनों की मौजूदगी अब भी बनी हुई है, जहां वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराते रहते हैं। माओवादी संगठन स्थानीय ग्रामीणों के बीच भय का माहौल पैदा करते हैं और उनकी आर्थिक, सामाजिक और राजनीतिक गतिविधियों में हस्तक्षेप करते हैं। सुरक्षा बलों की लगातार कोशिशों के बावजूद, माओवादी संगठन पूरी तरह से समाप्त नहीं हो पाए हैं, और उनकी गतिविधियां अब भी कई स्थानों पर देखने को मिलती हैं।
सरकार और सुरक्षा बलों का यह दावा है कि पिछले कुछ वर्षों में माओवादी हिंसा में कमी आई है, लेकिन यह संकट अब भी राज्य के लिए एक गंभीर चुनौती बना हुआ है। माओवादी संगठन के खिलाफ की जा रही कार्रवाई और सुरक्षा बलों द्वारा छेड़े गए अभियानों में कुछ सफलता जरूर मिली है, लेकिन इसके बावजूद माओवादी संगठनों की ताकत पूरी तरह से खत्म नहीं हो पाई है।
विपक्षी दलों की आलोचना:
इस मुठभेड़ के बाद विपक्षी दलों ने राज्य सरकार की निंदा की है और माओवादी संकट पर उनकी नाकामी का आरोप लगाया है। विपक्ष का कहना है कि सरकार सुरक्षा बलों को पर्याप्त संसाधन और प्रशिक्षण नहीं दे रही है, जिससे नक्सलवादी ताकतों के खिलाफ प्रभावी कार्रवाई नहीं हो पा रही है। हालांकि, राज्य सरकार का कहना है कि माओवादी गतिविधियों पर काबू पाने के लिए वे लगातार सुरक्षा बलों को सुदृढ़ कर रहे हैं और इस दिशा में कई बड़े कदम उठा रहे हैं।